कथा संग्रह (Stories) कथा 📖 22 अध्याय / कथा ⏱ कुल पठन समय: ~277 मिनट

चर्चरी

रचयिता: हरिमोहन झा (1960)

मिथिलाक सामाजिक जीवन, दलानपरक गप्प-शप्प, ग्रामसेविका आ आधुनिक शिक्षाक विविध पक्ष सभ पर आधारित २२ मनोरंजक व्यंग्य कथाक संग्रह।

📑 अध्याय / कथा अनुक्रमणिका (Table of Contents)

कुल 22 खंड
अध्याय 1

चर्चरी : 1. ग्रेजुएट पुतोह

पंडित काकाक आङन मे आइ बी० ए० पास कनियाँ आबि रहल छथिन्ह । ई सुनितहि सौंसे गाम मे कुतुहलक बाढ़ि आबि गेल । स्त्रीगणक देह...

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अध्याय 2

चर्चरी : 2. मर्यादाक भंग

आइ पण्डितजीक आङनमे हूलिमालि उठल छैन्ह। कारण जे एक पाहुन आबि गेल छथिन्ह। सेहो विशिष्ट लोक। दुलारपुरक चौधरी। हुनक...

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अध्याय 3

चर्चरी : 3. ग्रामसेविका

मकुनाही पोखरिपर लूटन मिसर वैद्यकेँ मुँह धोइत देखि काशीनाथ कहलथिन्ह- वैद्यजी, एकटा नव गप्प सुनलिऎक अछि? वैद्यजी...

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अध्याय 4

चर्चरी : 4. परिवर्तन

पन्डितजी विद्यालयसॅं ऎलाह त देखै छथि जे डेरामे ताला बंद अछि। बाहर कलपर पनिभरनीकेँ पानि भरैत देखि पुछलथिन्ह- की गय!...

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अध्याय 5

चर्चरी : 5. युगक धर्म

रमेश बाबू, ओ कन्या साक्षात् लक्ष्मी थीक। देखबामे दुर्गाक मुर्त्ति, शील-स्वभावमे गंगा। भोजन कराबयमे अन्नपूर्णा। कहाँ...

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अध्याय 6

चर्चरी : 6. महारानीक रहस्य

ओहि दिन वर्षा झहरैत रहैक। हम क्लबमे बैसल चाह पिबैत रही। संगी सभ ताश-शतरंज खेलि कऽ अपन-अपन घर चलि गेल रहथि। एसकरमे...

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अध्याय 7

चर्चरी : 7. पाँच पत्र

( १ ) दड़िभंगा १-१-१९ प्रियतमे, अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सय बेर पढ़लहुँ । तथापि तृप्ति नहि भेल । आचार्यक परिक्षा...

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अध्याय 8

चर्चरी : 8. सात रंगक देवी

(१) प्रायः ३० वर्ष पहिनेक गप्प कहै छी। हम बहिनक सासुर गेल रही। हुनक ससुर धर्मशास्त्राचार्य। साठि-सत्तरसे कम नहि छल...

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अध्याय 9

चर्चरी : 9. नौ लाखक गप्प

ओहि देन सायंकाल चाय पिबैत रही कि ताहि बीचमे नौकर एक टा 'विजिटिंग कार्ड' दऽ गेल। ओहिपर अंग्रेजी अक्षरमे लिखल छलैक-...

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अध्याय 10

चर्चरी : 10. तिरहुताम

हमरा पुर्नियाँ जैबाक छल। परन्तु जे गाड़ी ७ बजे साँझमे कटिहार पहुँचबाक रहय से पहुँचल ९ बजे रातिमे। परिणाम ई जे कनेक्शन...

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अध्याय 11

चर्चरी : 11. अलंकार-शिक्षा

भोलबाबा नोसि बनबैत रहथि । हमरा देखि पुछलन्हि - की हौ, कतय चललह अछि ? हम कहलिऎन्ह - अपनेक ओहिठाम किछु अलंकारक ज्ञान...

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अध्याय 12

चर्चरी : 12. ब्रह्माक शाप

एक दिन ब्रह्मा मनुष्यक मूर्त्ति गढैत रहथि। ताही बीचमे की फुरलैन्ह जे भाङ पीबि लेलन्हि। भाङ रहैक तेज। तुरन्त नशा चढि...

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अध्याय 13

चर्चरी : 13. तीर्थयात्रा

एक बेर कलकत्तामे जे दृश्य देखल से औखन आँखिमे नाचि रहल अछि। बोटेनिकल गार्डनमे गेल रही। विशाल वटवृक्षकेँ देखि मनमे एक...

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अध्याय 14

चर्चरी : 14. अयाची मिश्र

प्रथम दृश्य (मातृ वन्दना-पाँँच बालक द्वारा सम्मिलित गान) (आसावरी) द्वितीय दृश्य (पंडित अयाची मिश्र पूजापर बैसल छथि।...

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अध्याय 15

चर्चरी : 15. मंडन मिश्र

दृश्य १ [मंडन मिश्रक इनार । पनिसालाक दृश्य । एकटा तरुणी पनिभरनी लाल नूआ लहठी पहिरने पानि भरि रहल अछि । एकटा युवा...

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अध्याय 16

चर्चरी : 16. एहि बाटे अबै छथि सुरसरि धार

(१) आइसॅं पचास वर्षक बाद। सौराष्ट्रमे सामुदायिक विवाह यज्ञ भऽ रहल अछि। समावर्त्तन भोज्यक अनन्तर पंचमन्दिरक प्रांगणमे...

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अध्याय 17

चर्चरी : 17. संगठनक समस्या

श्रीमान् सम्पादक जी, अत्र कुशलं, तत्रास्तु। आगाँ सुरति जे अपनेक पत्र भेटल। परंच लेख की पठाउ से फुरितहि ने अछि। नहि...

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अध्याय 18

चर्चरी : 18. दलानपरक गप्प

ओहि दिन लालककाक दलानपर गप्प जमि गेल। हुनका ओहिठाम चतुर्थीक हकार पूरय लोक आएल रहय। चानन-काजर होइत रहैक। ताही बीचमे...

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अध्याय 19

चर्चरी : 19. चौपाड़िपरक गप्प

आहि दिन पं० जीक चौपाड़िपर नोतिहारी सभ बैसल रहथि। बिझौ भऽ गेल रहैक, परन्तु भोजनमे किछु विलंब रहैक। ताही बीचमे पहुँचि...

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अध्याय 20

चर्चरी : 20. घूरपरक गप्प

ओहि दिन भयंकर झपसी लधने रहय। यारकका घूरपर बैसल लोक आगि तपैत रहय। बीच-बीचमे तेहन पुरबैयाक झटक उठैक जे लोक सिहरि उठय।...

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अध्याय 21

चर्चरी : 21. पोखरिपरक गप्प

ओहि दिन भोज खा कऽ लोक फिरल चल अबैत रहय कि मकुनाही पोखरि लग वर्षा झहरय लगलैक। लोक पड़ा कऽ ब्रह्मथान तर आबि बैसल।...

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अध्याय 22

चर्चरी : 22. रेलक झगड़ा (प्रहसन)

पहिल दृश्य [स्थान: स्टेशनक प्लैटफार्म, एक प्रौढ़ा महिला सेकेंड क्लासक जनानी डब्बामे चढय चाहै छथि, ओम्हर रेलक भीतर सॅं...

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