लोकगाथा श्रृंखला लोकगाथा 📖 69 अध्याय / कथा ⏱ कुल पठन समय: ~581 मिनट

गोनू झाक हास्य लोकगाथा

रचयिता: गोनू झा

मिथिलाक प्रसिद्ध विदूषक गोनू झा केर बुद्धि, चतुराई, हाजिरजवाबी आ नीतिपरक मनोरंजक लोककथा संग्रह।

📑 अध्याय / कथा अनुक्रमणिका (Table of Contents)

कुल 69 खंड
अध्याय 1

खेत जोत गए चोर

खेत भी तरह-तरह के होते हैं । सब कुछ मिट्टी पर निर्भर है कि किस खेत का क्या नाम होगा और किस तरह की मिट्टी वाले खेत को...

⏱ 15 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 2

गोनू झा की कुश्ती

एक बार मिथिला के राजदरबार में दिल्ली का एक पहलवान आया। वह सात फुट ऊँचा भारी डील-डौल वाला, मजबूत शरीर वाला पहलवान था...

⏱ 6 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 3

कोड़ों की सजा

मिथिला नरेश कलाप्रिय व्यक्ति थे। अपने राज्य में कलाप्रेमियों को प्रोत्साहित करने के लिए वे प्रायः प्रतियोगिताओं का...

⏱ 13 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 4

धान का चढ़ावा

“ईश्वर सर्वव्यापी है लेकिन वह मनुष्य के कर्म में हस्तक्षेप नहीं करता । उसे मनुष्य के भाव, मनुष्य की आस्था से ही...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 5

गुलाबक सुगन्ध

मिथिला के हर घर के आँगन में बेला, चमेली, कचनार, जूही, कनक, कटेली चंपा, रातरानी सन फूल के पौधा भेटे जायत। एक दिन...

⏱ 4 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 6

गोनू झा और सच्ची गप्प

बात उन दिनों की है जब गोनू झा राजदरबार में नियुक्त नहीं हुए थे। तब वह गांव में खेती-बाड़ी करते थे और उनकी आर्थिक...

⏱ 9 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 7

शुद्ध मिठाई का भोज

गोनू झा अपनी माँ से बहुत प्यार करते थे। उनकी माँ बहुत वृद्ध हो चुकी थीं । एक दिन उनकी माँ बीमार पड़ीं । वैद्य आए।...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 8

अथ श्रीबैल कथा

"अरे वाह, पंडित जी ! बहुत शानदार बैल लिए जा रहे हैं ! कितने में मिला ?" गोनू झा अभी पशु मेले से निकले ही थे कि एक...

⏱ 7 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 9

ठग उन्मूलन अभियान

मिथिला में चोर -उचक्कों और ठगों का कभी बहुत जोर था । चोर-उचक्कों के इस जोर के कारण ही कोई अजनबी न तो मिथिला जाना...

⏱ 21 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 10

धन की सुरक्षा का कारण

गोनू झा मिथिला-दरबार के विदूषक बनाए जाने से पहले विपन्न थे। उन्हें कोई पूछता नहीं था । जब वे मिथिला नरेश के...

⏱ 16 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 11

खेत की सिंचाई

शातिर चोरों को हवालात की सैर करवाने के कारण गोनू झा पूरे मिथिलांचल के चोरों की आँखों की किरकिरी बन गए। मिथिला में ठग...

⏱ 12 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 12

गोनू की बहादुरी

गोनू झा की शादी हुई । मिथिलांचल में ब्राह्मणों के विवाह का आनन्द ही कुछ और है । ऐसे भी रामायण काल से ही मिथिला को...

⏱ 10 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 13

असम्भव हुआ सम्भव

मिथिला नरेश के दरबार में जब कभी कोई काम नहीं रहता या महाराज मनोरंजन की इच्छा प्रकट करते तो सारी औपचारिकताएँ समाप्त...

⏱ 12 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 14

जैसे को तैसा

बात उन दिनों की है जब गोनू झा मिथिला नरेश के दरबारी नहीं थे। उनके दिन अभाव में गुजर रहे थे। उनके साथ उनका छोटा भाई...

⏱ 11 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 15

गुलाब की सुगन्ध

मिथिला के लोग पाक-कला में निपुण होते हैं । तीज -त्योहारों पर तो प्रायः हर घर में तरह- तरह के पकवान बनते हैं । आम...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 16

गोनूक खेती-बाड़ी

गोनू रहथि पंडित लोक । खेती-बाड़ी सँ कम्मे मतलब राखथि । तथापि जे किछु खेत-पथार रहनि ले कोहुना के करथि । हुनक जमीनक...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 17

गोनू झा मरे! गांव को पढ़े!!

ये कहानी गोनू झा के गांव की है। उनके गांव में भी बहुत बड़े वाले रहिते थे। कई लोग उनकी चालाकी से जलते थे, मगर मुंह पर...

⏱ 4 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 18

आँखों की तौल

मिथिला दरबार में गोनू झा की धूम मची रहती थी जिससे राम खेलावन मिश्र उर्फ मिसिर जी बहुत खीजे रहते थे। राम खेलावन यानी...

⏱ 6 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 19

गोनूझाक पटौनी

गोनू झा खेती-पथारी सँ कम्मे मतलब राखथि । अधिकांश समय राज दरबार मे बीतैन । तथापि जे किछु पुरखा लोकनिक छोड़ल खेत रहनि...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 20

गोनूक ढ़ाकी

जहिना गोनूक नाम तहिना हुनक आ हुनक भायक बीच भेल बँटवारा । गोनूक बढ़ैत प्रतिष्ठा सँ हुनक भाय बड़ जरथि आ सगरो दुष्प्रचार...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 21

अथ कनौसी कथा

गोनू झा का हास -परिहास और अपने कारनामों से लोगों को शिक्षा देने की प्रकृति केवल मिथिला नरेश के दरबार तक सीमित नहीं...

⏱ 6 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 22

गोनू झा के ग्रह-दोष निवारण

गोनू झा राजदरबार मे नियुक्त भऽ गेल छलैथ, सबटा गाँव गोनू झा पर गर्व कऽ रहल छल। गोनू गामक नाम जे रोशन केने छलैथ। सब...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 23

गोनू झा हुए पराजित

बसुआ यानी बासुदेव । गोनू झा के टहल -टिकोला में लगा रहने वाला उनके गाँव का एक किशोर। बसुआ, जिसका अपना सगा कोई नहीं था...

⏱ 8 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 24

अन्धों की सूची में महाराज

गोनू झा के साथ एक दिन मिथिला नरेश अपने बाग में टहल रहे थे। उन्होंने यूँ ही गोनू झा से पूछा कि देखना और...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 25

गोनू झा और उजालाक गाछ

एक बेर ईरान सँ एकटा व्यापारी मिथिलाक दरबार मे आयल छल। ओ बहुत धनिक छल आ एखनो बहुत मुनाफा कमा क अपन देश वापस लौट रहल...

⏱ 8 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 26

नहले पर दहला

एक शाम गोनू झा अपने तालाब के पास टहल रहे थे। मंद-मंद बयार बह रही थी । गाँव के घरों से धुआँ उठने लगा था । पनिहारिनें...

⏱ 18 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 27

आतिशबाजी का सामान

मिथिला नरेश का दरबार लगा हुआ था । सभा में गोनू झा भी उपस्थित थे। एक व्यक्ति एक छोटे संदूक के साथ दरबार में आया तथा...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 28

पोथी हुई समाप्त

गोनू झा जब बच्चे थे तब उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था । उनके माता-पिता थे कि उनके पीछे हाथ -धोकर पड़े रहते थे कि वे...

⏱ 4 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 29

गोनूक इनाम

गोनू झा अपन बुद्धिमत्ता आ वाकपटुताक लेल नहि केवल मिथिले वरन्‌ अरोस-परोसक राज्य मे सेहो मशहूर रहथि । हुनक पहुँच राज...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 30

लालच बुरी बला है भाई !

गोनू झा गद्गद मन से मिथिला नरेश के दरबार से अपने घर की ओर जा रहे थे। महाराज ने उन्हें एक भैंस भेंट की थी । भैंस बड़ी...

⏱ 19 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 31

पंडिताइन का सहारा

जब कोई साधारण व्यक्ति असाधारण सफलता अर्जित कर लेता है तब एक ओर तो उसके प्रशंसकों की बाढ़-सी आ जाती है तो दूसरी तरफ...

⏱ 8 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 32

चोर कें छकेलैन गोनू झा

गोनू झा रहथि सतर्क लोक । यद्यपि ओ कोनो धनवान लोक नहि रहथि तथापि गौंआ आ अनगौंआ कें लगैक जे हो ने हो हुनका लग कोनो...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 33

कृतघ्न प्राणी

मिथिला नरेश की जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही थी, वैसे-वैसे वे मनमौजी होते जा रहे थे। कई बार तो दरबारी उनके व्यवहार से चकित...

⏱ 6 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 34

गोनूक सपना

गोनू झा काली मायक बड्‌ड पैघ भक्त छलाह । ओना तँ संपूर्ण मिथिलांचल मे शक्तिपूजाक प्रधानता छैक, तथापि गोनू नित्य माताक...

⏱ 1 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 35

गोनू झा की शरण में दरबारी

गोनू झा अपने वाक्चातुर्य से सबका दिल जीत लेते थे। महाराज उनकी प्रतिभा के कायल थे। कठिन से कठिन अवसर पर गोनू झा का...

⏱ 8 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 36

माघ अमावस्या पर ढेले का टोटका

गोनू झा के गाँव में एक बार चोरों का एक गिरोह सक्रिय हो गया । गोनू झा के घर से भी कुछ सामानों की चोरी हो गई । गोनू झा...

⏱ 9 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 37

गोनूक बड़द

गोनू झा खेती-बाड़ी सँ कम्मे मतलब राखथि । राज दरबारक काज सँ फुर्सति नहि रहनि तथापि बाप-पुरखाक छोड़ल जमीन पर येनकेन...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 38

उपदेशी को सबक

गोनू झा एक दिन मिथिला बाजार में चहल-कदमी कर रहे थे। वहाँ एक सेठ एक भारी बक्सा लिए बैठा था और बार-बार मजदूरों को...

⏱ 4 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 39

गोनू झा की चतुराई

मिथिला नरेश की सभा में उनके बचपन का मित्र परदेश आया था। नरेश उन्हें अपने अतिथि कक्ष में ले गए। उन्होंने अपने मित्र...

⏱ 2 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 40

चार पंक्तियों में रामायण

गोनू झा अभी जगे ही थे कि चार नवयुवक उनके घर पहुँचे और गोनू झा के दरवाजे पर दस्तक दी । गोनू झा मन ही मन भुनभुनाये न...

⏱ 10 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 41

गोनू झा की नियुक्ति

पूरे मिथिलांचल के नौजवानों में खलबली मची हुई थी । प्रायः हर बेरोजगार नौजवान उस प्रतियोगिता की तैयारी में जुटा हुआ था...

⏱ 10 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 42

गोनूक बिलाड़ि

गोनू झाक बुद्धिमत्ताक लोहा सभ कियो मानैत छल । अपन बुद्धिमत्तेक बल पर ओ मिथिलाक राजदरवार मे आदर पबैत छलाह । एक बेर...

⏱ 2 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 43

भाई को सीख

“देख भोनू ! मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ । तुम्हारा भला ही सोचूँगा। यह घर हमारा है हम लोगों का है । घर की बात घर में...

⏱ 28 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 44

गोनू झा के चतुराई

मिथिला नरेश केर सभा मे हुनक बचपन के मित्र परदेश ऐल छल। नरेश हुनका अपन अतिथि कक्ष मे लऽ गेलैथ। ओ अपन मित्र के खूब...

⏱ 2 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 45

कंजूस राजा को नसीहत

मिथिला नरेश के दरबार में गोनू झा के बुद्धिकौशल और वाक्चातुर्य का जो जादू चल रहा था उसकी कीर्ति मिथिलांचल के आस -पास...

⏱ 16 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 46

पड़ोसी का पीढ़ा

मिथिलांचल में खुशियों की सौगात लेकर आम मंजराए। गाँवों में बसन्त का आगमन उस साल कुछ ऐसा हुआ कि हर चेहरे पर रौनक बढ़...

⏱ 9 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 47

बात ऐसे बनी

गोनू झा का पड़ोसी था राम खेलौना । ब्राह्मण कुल में जन्मा था किन्तु आचरण से शूद्र । उसके पिता ने उसे पढ़ाने -लिखाने...

⏱ 11 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 48

पेड़ पर जेवर

गोनू झा अपनी तीव्र बुद्धि के कारण न केवल मिथिला में प्रसिद्ध थे बल्कि उनकी प्रसिद्धि दूर-दराज तक पहुँच गई थी । उनके...

⏱ 16 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 49

गोनूक नोकर

गोनू झाक बुद्धिमत्ताक खिस्सा मिथिलाक घर-घर मे आइयो कहल-सुनल जा रहल अछि । गोनूक नोकर रहनि – वसुआ । वसुआ रहय सोझमतिया...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 50

बौराये भोनू का बचाव

भोनू झा गोनू झा के छोटे भाई थे । बड़े भाई के प्रति सम्मान भाव की कमी नहीं थी भोनू में, लेकिन उसे मलाल इस बात का था...

⏱ 6 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 51

समान वितरण व्यवस्था

एक दिन मिथिला नरेश के दरबार में एक साधु आया । नरेश ने उनकी आवभगत की । श्रद्धा से कर जोड़े। आशीष ग्रहण किया । साधु ने...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 52

दाढ़ी के बाल से मुक्ति का मार्ग

मिथिला नरेश के दरबार में एक तहसलीदार नया-नया बहाल हुआ था । लोगों से जबरन मालगुजारी वसूलकर वह महाराज की नजरों में...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 53

गोनूक कबुला

गोनू रहथि विद्वान लोक । ओ कखनो अंधविश्वास आ कि देवता-पितरक कबुला-पाती मे विश्वास नहि राखथि आ तें जन-सामान्य जकाँ...

⏱ 2 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 54

अपनों का सच

गोनू वृद्ध हो चले थे। महाराज के दरबार में वे एक हस्ती बन चुके थे। एक दिन महाराज ने अपने पिता की पुण्य तिथि पर एक...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 55

गोनू झा आ चोरक परीक्षा

गोनू झाक बुद्धिमत्ता सँ चोर सभ किना स्वयं अपन जालमे फँसलाह, मिथिलाक प्रसिद्ध मनोरंजक लोककथा...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 56

दूध से भागने वाली बिल्ली

मिथिला में एक बार चूहों की संख्या इतनी बढ़ गई कि लोगों का जीना हराम हो गया । चूहे खेत- खलिहान में उत्पात मचाते । धान...

⏱ 8 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 57

गोनू झा को 'मृत्यु दंड'

गोनू झा के वाक्चातुर्य और बुद्धि-कौशल पर मुग्ध थे मिथिला नरेश ! कोई भी उलझन आए, गोनू झा उसे चुटकियों में सुलझा लेते...

⏱ 22 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 58

रात का भाव

गोनू झा एक रात सोए हुए थे। उनकी पत्नी गहरी नींद में उसी पलंग पर सो रही थी जिस पर गोनू झा सोए हुए थे । गोनू झा कच्ची...

⏱ 9 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 59

गोनू झा के स्वर्ग बजाहट

गोनू झा एकटा राजाक दरबारी रहथि । ओ बहुत चतुर छलथि आओर राजाक राज-काज मे मदद करैत छलथि आओर हुनकर खूब मनोरंजन करैत छलथि...

⏱ 7 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 60

मिथिला से चोरों का सफाया

मिथिलाँचल जिस तरह मछली और मखाने के लिए प्रसिद्ध रहा है, कभी यह चोरों के उत्पात के लिए भी उतना ही बदनाम था । मिथिला...

⏱ 48 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 61

सूद-मूल बराबर

गोनू झा अपने आरम्भिक दिनों में बहुत गरीब थे। दो जून की रोटी जुटाना उनके लिए कठिन था । ऐसे ही दिनों में घर में ऐसी...

⏱ 4 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 62

माँ काली का वरदान

सभी जानते हैं कि गोनू झा माँ काली के परम भक्त थे। गोनू झा की श्रद्धाभक्ति से माँ काली प्रसन्न हो गईं। उन्होंने गोनू...

⏱ 3 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 63

गोनू झा आ लालची ढोलकदास

बात ओहि दिनक अछि जखन गोनू झा दरबार मे छलाह। मिथिला नरेश हुनका एक सप्ताह के लेल शाही अतिथि बना कऽ रोकने छलथि। गोनू झा...

⏱ 8 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 64

फिर छकायल चोर

गोनू रहथि सतर्क आ बुद्धिमान लोक । अपन बुद्धिमत्ता आ विद्वताक बल पर ओ सदैव मिथिलाक राजदरवार मे आदर पाबथि आ यदा-कदा...

⏱ 5 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 65

स्वर्ग से वापसी

मिथिला महाराज के दरबार में गोनू झा का सम्मान दिनों -दिन बढ़ता जा रहा था । उनके बढ़ते प्रभाव से महाराज के दरबार के...

⏱ 7 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 66

साधु बन गए गोनू झा

मिथिलांचल में साध- सन्तों में लोगों को काफी भरोसा है । गोनू झा के जमाने में भी था । गोनू झा के पिता सत्संग प्रेमी...

⏱ 8 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 67

कर्म ही पूजा है

एक बार मिथिलांचल में भयंकर सूखा पड़ा । अनावृष्टि और अकाल से त्रस्त मिथिलावासियों के लिए अनाज का दाना तक मयस्सर होना...

⏱ 6 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 68

चोरों ने तौबा कर ली

गोनू झा और चोरों के बीच आँख -मिचौली बरसों चलती रही। गोनू झा महाराज को वचन दे चुके थे कि उनके रहते मिथिला में चोरों...

⏱ 7 मिनट पढ़ू ➔
अध्याय 69

गंगा का आशीर्वाद

एक बार की बात है। गोनू झा का पुत्र बीमार पड़ गया । गाँव के वैद्य की चिकित्सा चली मगर वह ठीक नहीं हुआ। राज वैद्य से...

⏱ 11 मिनट पढ़ू ➔