उपन्यास (Novel) उपन्यास 📖 12 अध्याय / कथा ⏱ कुल पठन समय: ~168 मिनट

कन्यादान

रचयिता: हरिमोहन झा (1930)

मैथिली भाषाक प्रथम अत्यंत लोकप्रिय आधुनिक उपन्यास। मिथिलाक वैवाहिक रीति-नीति, अनमेल विवाह, अशिक्षा आ आधुनिकताक द्वन्द्वक सजीव एवं मार्मिक चित्रण।

📑 अध्याय / कथा अनुक्रमणिका (Table of Contents)

कुल 12 खंड
अध्याय 1

कन्यादान : अध्याय 1 - कनेयाँ माइ क ओरिआओन

- हॅ ऎ बहिना । यैह त कठिन भऽ गेलैक अछि। जहां वर भारी 'गिलास' मे अङ्ग्रेजी पढि जाइत छैक, तहां वर क बाप हजार सॅं नीचा...

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अध्याय 2

कन्यादान : अध्याय 2 - सभागाछी क दृश्य

जखन सभागाछी पहुँचबा सॅं आध कोस बाँकी रहि गेलैन्ह तखन घुटर झा कैं बाह्यभूमि दिशि जैबाक शंका बूझि पड़लैन्ह । अपन...

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अध्याय 3

कन्यादान : अध्याय 3 - तार कोना पढ़ाओल गेल

फैसला सुनबा क समय यावत मुद्दालह लोकनि कठघरा मे ठाढ़रहैत छथि, तावत पर्यन्त हुनका लोकनि क सौसे देह भुलकैत रहैत छैन्ह ।...

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अध्याय 4

कन्यादान : अध्याय 4 - जहाज पर क गप्पशप्प

संध्या क समय अछि । सूर्य भगवान रुसल जमाय जकाँ मुँह विधुऔने प्रस्थान कय रहल छथि । गङ्गाजी क हिलकोर देखि भान होइछ जेना...

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अध्याय 5

कन्यादान : अध्याय 5 - गोसावनि क गीत

झारखंडीनाथ तार क अर्थ घोंखैत-घोंखैत गाम दिशि विदा भेलाह । एही धुन मे मस्त भेल बढल चल अबैत छलाह कि पाछां कनपट्टी लग...

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अध्याय 6

कन्यादान : अध्याय 6 - मिस्टर सी० सी० मिश्रा

गाड़ी छुटि गेला उत्तर बुचकुन चौधरी जाड़ तथा क्रोध क वेग सॅं थरथर काँपय लगलाह । गंगाजी क प्रति जे भक्ति छलैन्ह से...

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अध्याय 7

कन्यादान : अध्याय 7 - जटिल समस्या

भोलानाथ झा भोजन-छाजन क उपरान्त भाउजि कैं कहलन्हि- हमरा फेरि स्टेशन जाय पड़त । एहि ठाम क सभटा भार अही लोकनि क उपर रहल...

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अध्याय 8

कन्यादान : अध्याय 8 - गुप्त परामर्श

-काग की दोस? -काग। -फक्का मुट्ठी बारह। आब लाबह बारहटा अंडी। -से त नहि होएतौह, हे सरौता! एतेक कन्ना नहि करह। एतबहि मे...

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अध्याय 9

कन्यादान : अध्याय 9 - कौतुक

मिस्टर सी० सी० मिश्रा पड़ल-पड़ल भावी पत्नी क रंग-विरंगी काल्पनिक चित्र खिचबा मे तन्मय भेल छलाह । एहि बीच मे रेवतीरमण...

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अध्याय 10

कन्यादान : अध्याय 10 - कन्यादान

मण्डप पर बैसितहि मिस्टर सी० सी० मिश्रक नेत्र सभ सॅं पहिने ओहि सुपरिचित गुलाबी साड़ी क अन्वेषण मे इतस्ततः घूमय लागल। ई...

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अध्याय 11

कन्यादान : अध्याय 11 - चतुर्थी क राति

घोर अन्धकार व्याप्त भय रहल अछि। आकाश मे समुद्र क लहरि जकाँ चारू कात सॅं कारी-कारी मेघ उमड़ रहल अछि। बीच-बीच मे बिजली...

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अध्याय 12

कन्यादान : अध्याय 12 - उपसंहार

क्रमशः वर्षा थम्हि गेल। बिहाड़ियो बन्द भऽ गेल । आकाश निर्मल भऽ गेल। जखन भुरुकबा उगि गेलैक तखन बड़कागामवाली चुप्पहि उठि...

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