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चन्दा मामा आउ न

लेखक: पारंपरिक लोकवार्ता
(1960)
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अक्षर (Size):
चन्दा मामा आउ न, दूध-बतासा खाउ न! सोनेक थारीमे खीर परसब, आँगन बैसे बैसाउ न॥ नील गगन सँ उतरी कऽ, हँसि-हँसि बात सुनाउ न। बबुआ हमर सुतैत अछि, मीठ लोरी गाउ न॥ तारक संग करब खेल, नहि कखनो हठ ठाउ न। चन्दा मामा आउ न, दूध-बतासा खाउ न॥
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पारंपरिक लोकवार्ता

मिथिलाक सदियों पुरान मौखिक परंपरा, दादी-नानीक कथा, संस्कार गीत आ जनस्मृति संकलित रूप।

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