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नटखट चूहों आ बिलैया

लेखक: पारंपरिक लोकवार्ता
(1975)
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अक्षर (Size):
एकटा चूहा छल, नाम छल ओकर मुनमुन। ओ अत्यंत नटखट छल। घरमे जे वस्तु देखय, ओकरे कुतरि दैत छल— कखनो किताब, कखनो रोटी, तँ कखनो दादीक चश्माक डोरी! एक दिन घरमे एकटा बिलाड़ि आयल। बिलाड़क आँखि गोल-गोल आ मूँछ पैघ छल। मुनमुन चूहा डरक मारे अपन बिलमे नुका गेल। बिलक भीतर सँ मुनमुन झाँकि कऽ कहलक— 'मौसी! अहाँ बाहर की करि रहल छी?' बिलाड़ि हँसि कऽ कहलक— 'तोरा सँ मित्रता करय आयल छी।' चूहा कहलक— 'अहाँक मित्रतामे हमर जानक खतरा अछि। हम अपन बिलहिमे बेस छी!' चतुर चूहा बिल सँ बाहर नहि निकलल आ अपन प्राण बचेलक।
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पारंपरिक लोकवार्ता

मिथिलाक सदियों पुरान मौखिक परंपरा, दादी-नानीक कथा, संस्कार गीत आ जनस्मृति संकलित रूप।

व्यक्तित्व ओ रचनावली ➔

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