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सामा-चकेवाक अमर कथा

लेखक: पारंपरिक लोकवार्ता
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मिथिलामे कार्तिक शुक्ल द्वितीया सँ पूर्णिमा धरि सामा-चकेवाक लोकपर्व अत्यंत उल्लास सँ मनाओल जाइत अछि। पौराणिक अनुश्रुतिक अनुसार, भगवान श्रीकृष्णक पुत्री सामा अत्यंत दयालु ओ प्रकृति-प्रेमी छलीह। चुड़क नामक दुष्ट चुगलखोर हुनक विरुद्ध मिथ्या प्रवाद फहरायलक। क्रोधमे भगवान कृष्ण सामाकेँ पक्षी बनबाक शाप देलन्हि। हुनक पति चक्रवाक (चकेवा) सेहो पक्षी बनि गेल। जब सामाक भ्राता साम्ब (साम्बा) केँ एहि अन्यायक ज्ञान भेल, तँ ओ तपस्या कऽ अपन बहिन-बहनोईकेँ पुन: मानव रूप देबओलन्हि, आ चुड़कक दाढ़ी-मूँछ जरेबाक दंड देलन्हि। एहि स्मृतिकेँ अक्षुण्ण रखबाक लेल मिथिलाक कन्या सभ माटिक सामा, चकेवा, सतभैया, चुड़क आदिक मूर्ति बना कऽ भाईक दीर्घायु लेल रात्रिमे मंगल गान करैत छथि।
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पारंपरिक लोकवार्ता

मिथिलाक सदियों पुरान मौखिक परंपरा, दादी-नानीक कथा, संस्कार गीत आ जनस्मृति संकलित रूप।

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