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"प्रणम्य देवता" लेल 14 परिणाम भेटल:

साहित्य (Literature) STORY ✓ मूल मैथिली

प्रणम्य देवता : 2. धर्मशास्त्राचार्य

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

महामहोपाध्याय पं. धुरन्धर शास्त्री धर्मशास्त्रक कट्टर अनुयायी छलाह। ओ सभ कार्य स्मृतिक अनुसारे करैत छलाह। षट्कर्मी तेहन, जे जारनो कैं बिनु धोएने भानस मे नहि जाय दैत छलाह। नित्य अरबे-अरबान भोजन। अछिंजलक व्यवहार। कहियो फलाहार, कहियो पंचगव्य। ककरो सॅं...

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प्रणम्य देवता : 5. आदर्श कुटुम्ब

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

एक बेरि लहेरियासराय में कपड़ाक दोकान पर जे दृश्य देखल से एखनो धरि सिनेमाक दृश्य जकाँ आँखिमे नाचि रहल अछि। हम कुर्ताक कपड़ा लैत रही । ताबत देखै छी जे तीन व्यक्ति उच्च स्वर सॅं बजैत , दोकानक सोझाँ आबि , थक्कमक्क होइत ठाढ भऽ गेलाह । पहिने तीनू गोटाक...

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प्रणम्य देवता : 11. अंगरेजिया बाबू

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

मधुकान्त बाबू जखन कालेज मे नाम लिखौलन्हि त शौक भेलैन्ह जे सूट बनबाबी। जखन सूट बनबौलन्हि त शौक भेलैन्ह जे ई पहिरि कऽ सासुर जाइ। अतएव फगुआ सॅं चारि दिन पहिने जखन लाल रंगक फूलदार लिफाफ डाकपिउन हाथ मे देलकैन्ह तैखन ओ बुझलन्हि जे आब सूट पर इस्त्री चढाबक...

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प्रणम्य देवता : 10. बीमाक एजेंट

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

संसार मे दू वस्तु सॅं बचबाक उपाय नहि । एक यमदूत सॅं , दोसर बीमा कम्पनीक एजेंट सॅं ! यमदूत त जीवन मे एके बेर दर्शन दैत छथिन्ह , किन्तु बीमाक भूत जहाँँ एक बेर प्रवेश कैलन्हि तहाँँ जोंक जकाँँ सटि जाइत छथि । हुनका जतेक झाड़क कोशिश करू ततेक और भीतर पैसल...

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प्रणम्य देवता : 4. साझी आश्रम

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

बर्तुहारीक प्रसंग मे बहुतो तरहक अनुभव लोक कैं प्राप्त भऽ जाइत छैक । एक ठाम हमरो तेहन भयंकर सत्कार भेल जे स्मरण कय औखन देह सिहरि उठैत अछि। घटकराज सोनमनि चौधरी कहलन्हि- अमुक गाम मे एकटा बड़ सुन्दर कथा हमरा नजरि मे अबैत अछि। ओ उच्च वंशक छथि, प्रायशः...

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प्रणम्य देवता : 7. पंडित जी

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

जखन पं० जी कैं निमंत्रण-पत्र भेटलैन्ह त आङन मे पंडिताइन कैं कहलथिन्ह - एहि कागतक अर्थ छैक केहुनिया खाजा, डेढ़सेरा मुङवा.......... पंडिताइन मुँह ताकय लगलथिन्ह । पंडित जी बजलाह - मधुवन डेउढ़ी मे उअपनयन छैक । कुमरम सॅं रातिम पर्यन्त पंडित लोकनिक डेरा...

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प्रणम्य देवता : 9. भदेशक नमूना

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

सरस्वती दाइ अत्यन्त संस्कारिणी ओ चमत्कारिणी छलीह । दुर्गा ओ गीता पाठ करयवाली । बजबाक चमत्कार तेहन जे अरिकोंच कैं 'अरिकंचन' कहैत छलीह, बॅंसबाड़ि 'वंशवाइरि' । परन्तु भगवानो त विचित्र कौतुकी छथि । हुनक विवाह भेलैन्ह भदेशक मौजे लाल झा सॅं जे निट्ठाह...

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प्रणम्य देवता : 3. विकट पाहुन

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

भादवक राति। साँझेसॅं जे झपसी लधलक से क्रमशः बढिते गेल। जखन एगारह बजे रोशनी मिझा गेलैक त समस्त होस्टल अन्हार कुप्प भऽ गेल। चारू कात निस्तब्ध। केवल फूही झहरबाक स्वर एक तालसॅं नीरवता भंग करैत छल। हमहूँ पुस्तक कैं सीरम मे राखि निद्रादेवीक आवाहन करय...

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प्रणम्य देवता : 8. कविजी

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

कविजी मे तीन टा विलक्षण गुण छलैन्ह। ओ अत्यन्त भावुक छलाह। एतेक भावुक, जे कल्पित नायिकाक व्यथा सॅं आँखि मे नोर भरि अबैत छलैन्ह। दोसर, जे ओ नख सॅं शिख पर्यन्त सौन्दर्यक उपासक छलाह। एहन रसिक, जे अपन उपनाम 'अंचल' रखने छलाह। तेसर, जे ओ प्रगतिशील छलाह।...

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प्रणम्य देवता : 6. ज्योतिषाचार्य

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

गाम मे दू टा ज्योतिषी रहथि। एक फोंचाइ झा, दोसर खट्टर झा। दुहू ज्योतिषी अगाध विद्वान। परन्तु दुहू मे अश्वमाहिष्य योग लागल रहैन्ह। एक ईर घाट, त दोसर वीर घाट। एक जे बाजथि तकरा दोसर बिनु कटने नहि रहथि। विशेषतः जितिया और छठि मे दुहू दिग्गजक भिड़ान देखबा...

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