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साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन खट्टर कका सॅं पुरातन सभ्य्ता पर गप्प छिड़ि गेल । हम कहलिऎन्ह – देखू, खट्टर कका, ताहि दिनक ऋषि-मुनि केहन त्यागपूर्ण जीवन व्यतीत करथि ! गुफा-कंदरा में रहि कंदमूल खा तपस्या करथि। ब्राह्म मुहूर्त्त में उठि, नदी में स्नान कय, बल्कल पहिरने, कंमडलु...
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साहित्य (Literature)
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
एम्हर एकदिन खट्टर कका सॅं भेट भेल छल । पुछलिऎन्ह- खट्टर कका प्रशन्न छी ? बजलाह- प्रशन्न की रहब ? सन्न छी । अपना देशक हालति देखिकऽ । सुजला, सुफला, शस्यश्यामला भूमि में हमरा लोकनि अजला अफला, सुन्यश्यामला बना देलिऎन्ह और भिक्षापात्र नेने संसार क आगाँ...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन फगुआ रहैक । खट्टर कका तीन बेर पीबि चुकल छलाह और चारिम बेर तैयारी कय रहल छलाह । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, ओहि फगुआ में अहाँ कहने रही जे वेद में श्रृंगार-रस भरल छैक । (देखू,ब्रह्मानन्द वाला तरंग) खट्टर कका गुलाबी नशा में रहथि । ई सुनितहिं आँखि...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका दलान पर बैसल भाङ्ग घोटैत छलाह । हमरा अबैत देखि बजलाह – हॅं!- हॅं;....ओम्हर मरचाइ रोपल छैक, घूमि कऽ आबह। हम कहलिएन्ह - खट्टर कका, आइ जयवारी छैक, सैह सूचित करय आयल छी खट्टर कका पुलकित होइत बजलाह - वाह वाह ; तखन सोझे चलि आबह। दू एकटा धङ्गेवे...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन खट्टर कका हमरा देखि पुछलन्हि - हौ, आइ बहुत दिन पर देखलिऔह । कहाँ छिटकल जाइ छह ? हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, अहाँ लग अबैत डर होइ अछि । ख० - से किऎक ? हम – अहाँ भगवान कैं नहिं मानैत छिऎन्ह । खट्टर कका मुसकुराइत बजलाह - बुझह त भगवाने हमरा नहिं...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका भांगक हेतु सौफ-मरीच बिछैत रहथि । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका ! पूजाक हॅंकार देने जाइ छी । ख०- कथी क पूजा ? हम - आइ हमरा ओहि ठाम सत्यदेव क पूजा छैन्ह । ख०- सत्ते ? हम - सत्य नहिं त फूसि ? हमरा मूॅंह तकैत देखि खट्टर कका बजलाह - परन्तु हौ जी,...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका भाङ्ग धोइत रहथि। हमरा संग एक व्यक्ति कैं देखि पुछ्लथिन्ह - ई के थिकाह ? हम कहलिएन्ह - ई थिकाह वैद्यजी । खट्टर कका हुनका हाथ में एक पुस्तक देखि पुछलथिन्ह – ई कोन पोथी थीक ? वैद्यजी - भावप्रकाश । खट्टर कका - अहा, की सुन्दर काव्य थीक -...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका इनारक सब्जी पर बैसल कुरुड़ करैत रहथि । हम कहलिएन्ह - खट्टर कका ! अहाँक नाम तऽ दूर-दूर धरि प्रख्यात भऽ गेल । खट्टर कका बजलाह - हॅं , सुक्रिये नाम की कुक्रिये नाम ! तों तेहन-तेहन गप्प हमर छपौलह जे चारुकात पसरि गेल । संपूर्ण मिथिला में ।...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका हमरा हाथ में मोटगर पुस्तक देखि पुछलन्हि - हौ, ई की थिकैक ? हम कहलिऎन्ह - आदर्श चरितावली । खट्टर कका उनटबैत-पुनटबैत बजलाह – ई सभ पढने माथा खराब भऽ जैतौह । हम - खट्टर कका, ई की कहैत छी ? एहि में एक सॅं एक आदर्श चरित्र भरल छथि जिनकर अनुकरण...
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खट्टर कका भाङक नशा में बुत्त रहथि । हमरा हाथ में ग्रन्थ देखि पुछलन्हि- ई की थिकौह ? हम कहलिऎन्ह - दर्शन शास्त्र । खट्टर कका मुस्कुरा उठलाह । बजलाह - आब तोरा पर बतहपन सवार भेलौह अछि ? हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, दर्शनकार कैं अहाँ बताह कऽ कऽ बुझैत छिऎन्ह...
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खट्टर कका रामनवमी क हेतु फलाहार क ओरिआओन करैत रहथि। हम पुछलिऎन्ह - आइ पुरना पोखरि पर रामलीला छैक। चलब कि ने ? खट्टर कका बजलाह – तोरा लोकनि छौडा-मांगर छह। तमासा देखह गऽ। बूढ-सूढ कैं एहि सभ सॅं कोन प्रयोजन ? हम- से किएक, खट्टर कका ? एहि में त सभ कैं...
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ओहि दिन माछ पर शास्त्रार्थ बजरि गेल। बात भैलैक जे खट्टर कका पोखरि सॅं स्नान कैने चल अबैत रहथि। हम पुछलिऎन्ह - की खट्टर कका, माछ खाइ ? खट्टर कका बजलाह – अवश्य, अवश्य । कोन माछ छौह ? नेबो छौह कि बाडी सॅं नेने चलू ? हम कहलिऎन्ह - केवल सिद्धान्तक...
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ओहि राति चन्द्र-ग्रहण लागल रहैक । सौंसे गामक लोक उमड़ि कऽ बड़का पोखरि में स्नान करैत छल । ओम्हर खट्टर कका अपना दलान में बैसल घूर तपैत रहथि । हम जा कऽ कहलिऎन्ह- खट्टर कका, ग्रहण स्नान नहिं करबैक । खट्टर कका बजलाह – हौ, ई पूस मास ! पाला पड़ैत ! ताहि में...
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ओहिदिन खट्टर कका खाट घोरैत रहथि । हमरा संग में एक व्यक्ति कैं देखि कऽ बजलाह – हौ, ई झुल्फी बला के छथिन्ह ? हम कहलिऎन्ह – ई कवि छथि । हमर सार थिकाह । अपन कविता अहाँ कैं सुनाबय चाहैत छथि । खट्टर कका बजलाह - आइ हमरा बैसि कऽ कविता सुनबाक फुरसति नहिअछि।...
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खट्टर कका भांग धो कऽ पसबैत रहथि । हमरा संग एक अपरिचित व्यक्ति कैं देखि पुछलैन्ह – हौ, ई के छथुन्ह ? यदि ककरो हाथ में कुश देखी त कुशल नहिं । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, राति बथेयाबाली कैं भूत लागि गेलैन्ह। हुनके झाड़क हेतु आएल छथिन्ह । ई बड़का भरी ओझा छथि...
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