साहित्य (Literature)
NOVEL
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
विश्वविद्यालयक सभा-भवन आइ बिजलीक प्रकाश सॅं जगमगा रहल अछि। कारण जे भिन्न- भिन्न विद्यालयक छात्र-छात्रागण विवाद प्रतियोगिता मे भाग लेबक हेतु उपस्थित भेल छथि । एक प्रतिष्ठित विद्वान सभापतिक उच्च स्थान पर आसीन छथि । विवादक विषय थिक - 'नारीक...
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रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
भादवक पूर्णिमा कैं चन्द्रग्रहण थिकैक । लालकाकी एहि बेरि सदलबल काशी जैबाक न्यार कैने छथि । दल मे रहथिन्ह ढुनमुन काकी, बुच्चीदाइ, आवेशरानी, भखराइनवाली तथा ज्योतिषिआइन । बल मे रहथिन्ह - भोलानाथ झा, बटुकजी तथा पं० नमोनाथ झा । दशमीक रात्रिशेष मे भुरुकवा...
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रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
तार पहुँचैत देरी खढ़भढ़ मचि गेल लालकाकी बजलीह कहू त भला एना कतहु द्विरागमन भेलैक अछि ! भोलानाथ अनुमोदन करैत कहलथिन्ह - त ! द्विरागमन मे कतेक ओरिआओन करय पडै़ छैक । कन्याक हेतु कपड़ा-लत्ता, गहना-गुरिया....... ला० - बाजू-बिजौठ, बड़हरी, नकमुन्नी,...
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रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
सी० सी० मिश्रक आदेशानुसार महिला-क्लब स्थापित करबाक उद्देश्य सॅं रेवतीरमण अपना गामक स्त्रीगण कैं सूचना देबक हेतु विदा भेलाह। पहिने ज्योतिषिआइनक घर सँ श्रीगणेश कैलन्हि। कहलथिन्ह- बाबी; आइ हम अपना ओहिठाम सभा करक चाहै छी। ज्योतिषिआइन विस्मित मुद्रा सँ...
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रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
सी० सी० मिश्र कैं ओहि राति बड़ी काल धरि नीन्द नहि पड़लैन्ह। मिस बिजलीक दमक सॅं निद्रोक आँखि में, चकाचौन्ह लागि गेलैन्ह। हुनक मस्तिष्क तेना विक्षोभित भऽ उठलैन्ह जे घंटो विचार- तरंग मे ऊब-डूब होइत भसियाइत रहलाह। सी० सी० मिश्र मनहिमन बिजली और बुचियाक...
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रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
प्रोग्रामक अनुसार सी० सी० मिश्र सासुरक डेरा मे आबि गेलाह और रेवतीरमण हुनक निर्देशानुसार बुच्चीदाइ कैं पढ़ाबय लगलथिन्ह । चिट्ठी-पत्री त बुच्चीदाइ पहिनहि सॅं जनैत छलीह । आब व्याकरण, साहित्य , गणित, इतिहास, और भूगोलक श्रीगणेश भेलैन्ह । प्रथम दिन...
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रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
गामक पंडित-प्रधान कैं एकत्र कऽ बुचकुन चौधरी कहलथिन्ह - आब 'ठोप' मेटा कऽ 'टोप' पहिरै जाउ और टीक कटा कऽ विलायतक टिकट कटबै जाउ । 'ईश' क स्थान मे 'ईशा' और 'गिरिजा' कऽ स्थान मे 'गिरजा' क पूजा होय । 'ब्रह्माण्ड' सॅं 'कुक्कुटाण्ड' और 'ओम' सॅं 'ओमलेट' पर...
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रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
मिस बिजली कैं छकैबाक हेतु सी० सी० मिश्रक पेट मे हर बहय लगलैन्ह । कखनो होइन्ह जे व्यायामशाला मे जा कऽ बौक्सिंग प्रैक्टिस करी । कखनो होइन्ह जे एक बढ़ियाँ घोड़ा लऽ कऽ मैदान मे सवारीक अभ्यास करी । कखनो होइन्ह जे गंगाक ओहि पार जा बन्दूक चलैबाह रेयाज करी ।...
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काशी स्टेशन पर उतरितहिं, यात्री-दल कैं चारू कात सॅं पंडाक झुण्ड घेरि कऽ चरो-बेरो कऽ लेलेकैन्ह। बाप-पितामहक नाम बूझि एक पंडा भोलानाथ आगाँ लगलैन्ह, दोसर पाछाँ। फाटक सॅं बहराइतहिं भीम पंडा कुली कैं ललकारि एक ताङ्गा पर पेटी लदबाबय लागल! ई देखि हनुमान...
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बिजली देखलन्हि जे 'एक अनाड़ी फतिङ्गा मॅंडरा कऽ जान देबा पर वृत्त अछि । दया कऽ कऽ एकरा निर्दयतापूर्वक झाड़ि देवक चाही, नहि त ई झरकि कय जरि जायत । एक दिन बिजली सी० सी० मिश्र कैं अपना गाड़ी मे हवा खोआबक हेतु बहुत दूर लऽ गेलथिन्ह । मिश्र जी हवागाड़ी मे...
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लालकाकी अमौटक हेतु आमक गाड़ा बनबैत छलीह कि आवेशरानी पहुँचि गेलथिन्ह । लालकाकी उल्लसित स्वर सॅं बजलीह - 'आबथु ऎ बहिना ! आइ त बिढ़नीक द्वारें जाने बाँचब कथिन अछि । फुचुकरानी कैं बिच्चे लुल्हुआ पर काटि लेलकैन्ह अछि । ओल लगौने बैसल छथि । आब हमरो पर...
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भोजक प्राते भेने द्विरागमनक विचार होमय लागल । भोलानाथ और कंटीर वस्तुजात कीनक हेतु दरिभंगा बिदा भेलाह । चिट्ठा देखि बुच्चिदाइ माय कैं कहलथिन्ह - देहाती गहना त हम एकोटा पहिरबौक नहि । पौती- पेटारक हमरा कोन काज पड़त ? और तेल-फुलेल, मसाला; तिलौरी कि...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
मधुकान्त बाबू जखन कालेज मे नाम लिखौलन्हि त शौक भेलैन्ह जे सूट बनबाबी। जखन सूट बनबौलन्हि त शौक भेलैन्ह जे ई पहिरि कऽ सासुर जाइ। अतएव फगुआ सॅं चारि दिन पहिने जखन लाल रंगक फूलदार लिफाफ डाकपिउन हाथ मे देलकैन्ह तैखन ओ बुझलन्हि जे आब सूट पर इस्त्री चढाबक...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
गाम मे दू टा ज्योतिषी रहथि। एक फोंचाइ झा, दोसर खट्टर झा। दुहू ज्योतिषी अगाध विद्वान। परन्तु दुहू मे अश्वमाहिष्य योग लागल रहैन्ह। एक ईर घाट, त दोसर वीर घाट। एक जे बाजथि तकरा दोसर बिनु कटने नहि रहथि। विशेषतः जितिया और छठि मे दुहू दिग्गजक भिड़ान देखबा...
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( १ ) दड़िभंगा १-१-१९ प्रियतमे, अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सय बेर पढ़लहुँ । तथापि तृप्ति नहि भेल । आचार्यक परिक्षा समीप अछि । किन्तु ग्रन्थ मे कनेको चित्त नहि लगैत अछि । सदिखन अहींक मोहिनी मुर्ति आँखि मे नचैत रहै अछि । राधा रानी ! मन होइ अछि जे अहाँक...
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