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साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि । हमरा हाथ में गीताक पुस्तक देखि बजलाह - आब तों गीताक पाठ करैत छह ? हम कहलिऎन्ह – हॅं ! खट्टर कका बजलाह – हौ बाबू, तखन आब तोरा सॅं फराके रहक चाही । हम चकित होइत कहलिऎन्ह - से किऎक, खट्टर कका ? खट्टर कका भांग रगरैत बजलाह –...
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#हास्य-व्यंग्य
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#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि कि हम जा कऽ कहलिऎन्ह - खट्टर कका, निमंत्रण दैत छी । खट्टर कका अत्यन्त प्रसन्न होइत बजलाह – अहा हा ! आबह, बैसह।आइ कोनो नीक लोक क मूंँह देखि उठल छलहुंँ । कथी क उपलक्ष्य में खोऎबह ? हम कहलिऎन्ह - आइ हमरा ओहि ठाम ब्राह्मणभोजन...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन फगुआ रहैक । खट्टर कका केसर बादाम दऽ कऽ भाङ्ग छनैत रहथि । हमरा देखितहि बजलाह - आबह-आबह । आइ केसरिया छनैत छैक। एक गिलास तोहूँ पीबि लैह । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, हम त नहिं पिबैत छी । ख० - तखन किऎक जिबैत छी ? नोनकाढा पीबक हेतु ? हौ, ई मानव जन्म...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका भाङ पिउने बुत्त रहथि। हमरा हाथ मे लोटा देखि पुछलन्हि- आइ भोरे-भोर कहाँ चललाह अछि ? हम - आइ शिवरात्रि थिकैक । महादेव पर जल ढारय जाइत छिऎन्ह । ख०- ई जाड़ मास। कनकन करैत। ताहि में तों भोरे-भोर पानि ढारय जाइत छहुन। से महादेव तोहर की बिगाड़लथुन्ह...
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ओहि दिन भुसकौलक बहिरु पंडित कैं खट्टर कका सॅं भिड़न्त भऽ गेलैन्ह । बात ई भेलैक जे पंडितजी छीतनबाबूक ओहि ठाम श्राद्धक नेओत पूरय आयल रहथि । भुटकुनबाबूक मृत्यु पर गप्प चलैत छल । पंडितजी ज्ञानक बात सभ कहऽ लगलथिन्ह – भावी पर ककरो वश नहिं चलैत छैक । हुनका...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका कोल्हुआड़ में रस पेरबैत रहथि । हमरा देखि बजलाह - आबह, आबह । तोंहू एक गिलास पीबि लैह । शीतल भऽ जैबह । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, शीतल त लोक अहाँक बाते सॅं भऽ जाइ अछि । अहाँ आनन्द-मूर्त्ति छि । खट्टर कका बजलाह – हौ, जीवन में और छैहे की ? आनन्द...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहिदिन खट्टर कका मखानक लावा फॅंकैत रहथि। हमरा हाथ में लेख देखि पुछलन्हि- ई की थिकौह ? हम कहलिऎन्ह- मिथिला क संस्कृति पर एकटा निबंध तैयार कैल अछि। खट्टर कका बजलाह- किछु हमरो सुनाबह। हम कहलिऎन्ह - पहिने राजर्षि जनक सॅं प्रारंभ कैने छिऎन्हि। ओ तेहन...
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खट्टर कका विजया क नशा में मस्त रहथि । आंँखि लाल रहैन्ह । हमरा दुर्गापाठ करैत बजलाह – तोरा लोकनि पाठ की करैत छह, ‘तुफान मेल' छोड़ै त छह । जेना चटिया सभ पहाड़ा पढै़त अछि । कनेक स्थिरता सॅं श्लोक बाँच ह जे नीक जकाँ अर्थ बूझऽ में आबय । हम पढय लगलहुं-...
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खट्टर कका आङ्गन में भोजन करैत रहथि । हमरा देखि बजलाह - आबह आबह । तोंहू बैसह । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, हम तुरंत भोजन कैने छी । एकटा समाचार कहय आयल छलहुँ । ख० - से की ? हम - आइ सभा छैक । धर्म पर व्याख्यान हेतैक । अहूँ चलब ? खट्टर ककाक ठोर पर मुसकी...
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हम प्रातःकाल क श्लोक पढैत चल अबैत रही - आकि बाटे में भेटलाह खट्टर कका। बजलाह - की भोरे भोरे अगत्ती सभक नाम लैत छह। हम कहलिऎन्ह – खट्टर कका, धर्मराज ॱॱॱॱॱॱॱॱ ॱ खट्टर कका टोकैत बजलाह- धर्मराज नहिं, बुड़िराज। एहन बूड़ि आइ धरि संसार में केओ भेल अछि जे जुआ...
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ओहि दिन खट्टर कका सॅं शास्त्रचर्चा छिडि गेल । बात ई भेलैक जे खट्टर कका चार छरबैत रहथि । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, भदबे में छवनी करबैत छिऎक ? खट्टर कका बजलाह – हौ, अनदिना जन नहिं भेटैत अछि । तैं घरहट कऽ काज हम भदबे में करा लैत छी । हम कहलिऎन्ह - खट्टर...
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खट्टर कका पुराण देखैत रहथि । हमरा देखि पुछलैन्ह – हौ, कोम्हर जाइ छह ? हम कहलिऎन्ह - ब्रह्मस्थान पर भागवत भऽ रहल छैक । हम कहलिऎन्ह - ब्रह्मस्थान पर भागवत भऽ रहल छैक । खट्टर कका बजलाह - तखन महा अनर्थ भऽ रहल छैक । हम - से किऎक, खट्टर कका । ख० – हौ,...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन ज्योतिषी मुसाइ झा हमरा ओहिठाम पतड़ा देखैत रहथि कि खट्टर कका भङघोंटना नेने पहुंचि गेलाह। हुनका देखितहि मुसाय झा अपन पोथी-पतड़ा समेटय लगलाह। परन्तु खट्टर कका पुछिए बैसलथिन्ह – की औ मुसाइ झा, की होइ छैक ? मुसाइ झा सिटपिटाइत बजलाह - दिन ताकि रहल...
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खट्टर कका कैं ओहि दिन भाङ्ग घोटैत पुरातत्व्क सनक सवार भऽ गेलैन्ह। दूर-दूर क बात फूरय लगलैन्ह। हमरा देखितहि सोर कैलन्हि- हौ, कहाँ जाइ छह? एम्हर आबह । हम कहलिएन्ह- खट्टर कका, एकटा जरूरी काज अछि । खट्टर कका- जरूरी काज पाछाँ कऽ हैतैक। एखन एकटा टटका...
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