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💡 टिप: अहाँ रोमन लिपि (अंग्रेजी अक्षर) मे सेहो लिखि सकैत छी (उदा. 'gonu jha', 'pokhari'), ई स्वतः देवनागरीमे खोजत।

"चर्चरी" लेल 24 परिणाम भेटल:

साहित्य (Literature) STORY ✓ मूल मैथिली

चर्चरी : 9. नौ लाखक गप्प

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि देन सायंकाल चाय पिबैत रही कि ताहि बीचमे नौकर एक टा 'विजिटिंग कार्ड' दऽ गेल। ओहिपर अंग्रेजी अक्षरमे लिखल छलैक- 'जा जारगंडी, प्रोड्युसर, मिथिलेटेड फिल्म कंपनी, बंबई।' नाम देखि हम अनुमान कैल जे कोनो अन्यदेशीय सज्जन हैताह। परन्तु जखन बजा पठौलिऎन्ह त...

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चर्चरी : 21. पोखरिपरक गप्प

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि दिन भोज खा कऽ लोक फिरल चल अबैत रहय कि मकुनाही पोखरि लग वर्षा झहरय लगलैक। लोक पड़ा कऽ ब्रह्मथान तर आबि बैसल। मड़ैयामे बड़का सौंफ पसरल रहैक से लोक सॅं भरि गेल। लंबोदर चौधरि बजलाह-इह! गर्मी सॅं मिजाज अक्कसक्क छल। आब जा कऽ ठंढा भेल। दीर्घनारायण...

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चर्चरी : 13. तीर्थयात्रा

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

एक बेर कलकत्तामे जे दृश्य देखल से औखन आँखिमे नाचि रहल अछि। बोटेनिकल गार्डनमे गेल रही। विशाल वटवृक्षकेँ देखि मनमे एक भावना उठल। एके मूलसॅं कतेक शाखा-प्रशाखा फुटकल छैक! तहिना ई मानव समाज अछि। परन्तु यदि एहि सामान्य बातकेँ लोक स्मरण राखि सकैत! हम ई...

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चर्चरी : 18. दलानपरक गप्प

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि दिन लालककाक दलानपर गप्प जमि गेल। हुनका ओहिठाम चतुर्थीक हकार पूरय लोक आएल रहय। चानन-काजर होइत रहैक। ताही बीचमे पहुँचि गेलाह भोलबाबा । पं० जी पान-सुपारी आगाँ बढ़बैत कहलथिन्ह - लेल जाओ । भोलबाबा कहलथिन्ह - अहाँ विद्वान छी, पहिने अहीं लियऽ । पं० जी...

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चर्चरी : 4. परिवर्तन

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

पन्डितजी विद्यालयसॅं ऎलाह त देखै छथि जे डेरामे ताला बंद अछि। बाहर कलपर पनिभरनीकेँ पानि भरैत देखि पुछलथिन्ह- की गय! मलकीनी कतय गेलथुन्ह अछि ? परन्तु ओ जेना सुनबाहिए नहि कैलकैन्ह। चमकि कऽ घैल माथपर उठौलक और दोसरा दिस विदा भऽ गेलि। तखन पण्डितजी...

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चर्चरी : 1. ग्रेजुएट पुतोह

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

पंडित काकाक आङन मे आइ बी० ए० पास कनियाँ आबि रहल छथिन्ह । ई सुनितहि सौंसे गाम मे कुतुहलक बाढ़ि आबि गेल । स्त्रीगणक देह मे गुदगुदी लागय लगलैन्ह । पंडिताइनक करेज भालरिक पात जकाँ काँपय लगलैन्ह। आइ काल्हि ए० बी० पढयबाली कनियाँक शानमे जुमब कठिन। बी० ए०...

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चर्चरी : 2. मर्यादाक भंग

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

आइ पण्डितजीक आङनमे हूलिमालि उठल छैन्ह। कारण जे एक पाहुन आबि गेल छथिन्ह। सेहो विशिष्ट लोक। दुलारपुरक चौधरी। हुनक सेवा-सत्कार मे कोनो भाङठ नहि होमक चाही। परन्तु समस्या ई जे पं० जी कैं कचहरीक काज सॅं ऎखन लहेरियासराय जैबाक छैन्ह। आब की हो? पंडिताइन...

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बीछल कथा : 9. विनिमय

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

गाड़ी तीव्र गतिसॅं जा रहल छल। 'एयरकंडीशन' क तीन गद्दापर तीन जोड़ दंपति विराजमान छलाह-बंगाल, पंजाब आ केरलक, जेना त्रिभुजक तीन विंदु। रातुक साढे दस बाजि रहल छल। तीनू पति पढबामे तल्लीन छलाह। पत्नीलोकनि अपना-अपना टिफिन-केरियरसॅं भोजन निकालि कऽ परसि रहल...

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साहित्य (Literature) NOVEL ✓ मूल मैथिली

द्विरागमन : अध्याय 6 - शिक्षाक प्रोग्राम

रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास

मिस बिजली कैं छकैबाक हेतु सी० सी० मिश्रक पेट मे हर बहय लगलैन्ह । कखनो होइन्ह जे व्यायामशाला मे जा कऽ बौक्सिंग प्रैक्टिस करी । कखनो होइन्ह जे एक बढ़ियाँ घोड़ा लऽ कऽ मैदान मे सवारीक अभ्यास करी । कखनो होइन्ह जे गंगाक ओहि पार जा बन्दूक चलैबाह रेयाज करी ।...

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