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मैथिली लोक समग्र ज्ञान खोज
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साहित्य (Literature)
NOVEL
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
भोलानाथ झा भोजन-छाजन क उपरान्त भाउजि कैं कहलन्हि- हमरा फेरि स्टेशन जाय पड़त । एहि ठाम क सभटा भार अही लोकनि क उपर रहल । ठकबा अछिए । जे किछु मॅंगाबक हो से मॅंगा लेब । झुनियाँमाय कैं बराबरि एत्तहि रहय कहबैक । देखब कोनो बात क विथुति नहि हो । बहुत पैघ लोक...
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#हास्य-व्यंग्य
#हरिमोहन झा
#उपन्यास
#कन्यादान
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन लालककाक दलानपर गप्प जमि गेल। हुनका ओहिठाम चतुर्थीक हकार पूरय लोक आएल रहय। चानन-काजर होइत रहैक। ताही बीचमे पहुँचि गेलाह भोलबाबा । पं० जी पान-सुपारी आगाँ बढ़बैत कहलथिन्ह - लेल जाओ । भोलबाबा कहलथिन्ह - अहाँ विद्वान छी, पहिने अहीं लियऽ । पं० जी...
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#हास्य-व्यंग्य
#कथा
#हरिमोहन झा
#चर्चरी
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
-"हे औ पाहुन! देखू, फेर हमरा दस पड़ल। आब अहाँक गोटी कटा गेल।" -"ए तित्तिर दाइ! कन्ना नहि करू। अहाँकें दू खुदरा पड़ल अछि।" -"नहि! दस पड़ल अछि। एकटा कौड़ी चित्त छैक से नहि सुझै अछि?" -"नहि! दू टा कौड़ी चित्त छल। अहाँ कंगनासॅं घुसका देलिऎक ताहिसॅं एकटा पट...
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#हास्य-व्यंग्य
#कथा
#हरिमोहन झा
#बीछल कथा
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका भाङक नशा में बुत्त रहथि । हमरा हाथ में ग्रन्थ देखि पुछलन्हि- ई की थिकौह ? हम कहलिऎन्ह - दर्शन शास्त्र । खट्टर कका मुस्कुरा उठलाह । बजलाह - आब तोरा पर बतहपन सवार भेलौह अछि ? हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, दर्शनकार कैं अहाँ बताह कऽ कऽ बुझैत छिऎन्ह...
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#कथा
#हरिमोहन झा
#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि कि हम जा कऽ कहलिऎन्ह - खट्टर कका, निमंत्रण दैत छी । खट्टर कका अत्यन्त प्रसन्न होइत बजलाह – अहा हा ! आबह, बैसह।आइ कोनो नीक लोक क मूंँह देखि उठल छलहुंँ । कथी क उपलक्ष्य में खोऎबह ? हम कहलिऎन्ह - आइ हमरा ओहि ठाम ब्राह्मणभोजन...
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#कथा
#हरिमोहन झा
#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन खट्टर कका सॅं शास्त्रचर्चा छिडि गेल । बात ई भेलैक जे खट्टर कका चार छरबैत रहथि । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, भदबे में छवनी करबैत छिऎक ? खट्टर कका बजलाह – हौ, अनदिना जन नहिं भेटैत अछि । तैं घरहट कऽ काज हम भदबे में करा लैत छी । हम कहलिऎन्ह - खट्टर...
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#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
पंडित काकाक आङन मे आइ बी० ए० पास कनियाँ आबि रहल छथिन्ह । ई सुनितहि सौंसे गाम मे कुतुहलक बाढ़ि आबि गेल । स्त्रीगणक देह मे गुदगुदी लागय लगलैन्ह । पंडिताइनक करेज भालरिक पात जकाँ काँपय लगलैन्ह। आइ काल्हि ए० बी० पढयबाली कनियाँक शानमे जुमब कठिन। बी० ए०...
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