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"द्विरागमन" लेल 22 परिणाम भेटल:

साहित्य (Literature) NOVEL ✓ मूल मैथिली

कन्यादान : अध्याय 7 - जटिल समस्या

रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास

भोलानाथ झा भोजन-छाजन क उपरान्त भाउजि कैं कहलन्हि- हमरा फेरि स्टेशन जाय पड़त । एहि ठाम क सभटा भार अही लोकनि क उपर रहल । ठकबा अछिए । जे किछु मॅंगाबक हो से मॅंगा लेब । झुनियाँमाय कैं बराबरि एत्तहि रहय कहबैक । देखब कोनो बात क विथुति नहि हो । बहुत पैघ लोक...

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चर्चरी : 18. दलानपरक गप्प

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि दिन लालककाक दलानपर गप्प जमि गेल। हुनका ओहिठाम चतुर्थीक हकार पूरय लोक आएल रहय। चानन-काजर होइत रहैक। ताही बीचमे पहुँचि गेलाह भोलबाबा । पं० जी पान-सुपारी आगाँ बढ़बैत कहलथिन्ह - लेल जाओ । भोलबाबा कहलथिन्ह - अहाँ विद्वान छी, पहिने अहीं लियऽ । पं० जी...

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बीछल कथा : 1. कन्याक जीवन

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

-"हे औ पाहुन! देखू, फेर हमरा दस पड़ल। आब अहाँक गोटी कटा गेल।" -"ए तित्तिर दाइ! कन्ना नहि करू। अहाँकें दू खुदरा पड़ल अछि।" -"नहि! दस पड़ल अछि। एकटा कौड़ी चित्त छैक से नहि सुझै अछि?" -"नहि! दू टा कौड़ी चित्त छल। अहाँ कंगनासॅं घुसका देलिऎक ताहिसॅं एकटा पट...

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खट्टर ककाक तरंग : 26. दर्शन शास्त्र क रहस्य

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

खट्टर कका भाङक नशा में बुत्त रहथि । हमरा हाथ में ग्रन्थ देखि पुछलन्हि- ई की थिकौह ? हम कहलिऎन्ह - दर्शन शास्त्र । खट्टर कका मुस्कुरा उठलाह । बजलाह - आब तोरा पर बतहपन सवार भेलौह अछि ? हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, दर्शनकार कैं अहाँ बताह कऽ कऽ बुझैत छिऎन्ह...

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खट्टर ककाक तरंग : 7. ब्राह्मण भोजन

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि कि हम जा कऽ कहलिऎन्ह - खट्टर कका, निमंत्रण दैत छी । खट्टर कका अत्यन्त प्रसन्न होइत बजलाह – अहा हा ! आबह, बैसह।आइ कोनो नीक लोक क मूंँह देखि उठल छलहुंँ । कथी क उपलक्ष्य में खोऎबह ? हम कहलिऎन्ह - आइ हमरा ओहि ठाम ब्राह्मणभोजन...

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खट्टर ककाक तरंग : 13. शास्त्रक वचन

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि दिन खट्टर कका सॅं शास्त्रचर्चा छिडि गेल । बात ई भेलैक जे खट्टर कका चार छरबैत रहथि । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, भदबे में छवनी करबैत छिऎक ? खट्टर कका बजलाह – हौ, अनदिना जन नहिं भेटैत अछि । तैं घरहट कऽ काज हम भदबे में करा लैत छी । हम कहलिऎन्ह - खट्टर...

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चर्चरी : 1. ग्रेजुएट पुतोह

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

पंडित काकाक आङन मे आइ बी० ए० पास कनियाँ आबि रहल छथिन्ह । ई सुनितहि सौंसे गाम मे कुतुहलक बाढ़ि आबि गेल । स्त्रीगणक देह मे गुदगुदी लागय लगलैन्ह । पंडिताइनक करेज भालरिक पात जकाँ काँपय लगलैन्ह। आइ काल्हि ए० बी० पढयबाली कनियाँक शानमे जुमब कठिन। बी० ए०...

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