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मैथिली लोक समग्र ज्ञान खोज

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"कथा" लेल 50 परिणाम भेटल:

साहित्य (Literature) STORY ✓ मूल मैथिली

चर्चरी : 3. ग्रामसेविका

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

मकुनाही पोखरिपर लूटन मिसर वैद्यकेँ मुँह धोइत देखि काशीनाथ कहलथिन्ह- वैद्यजी, एकटा नव गप्प सुनलिऎक अछि? वैद्यजी साकांक्ष होइत पुछलथिन्ह- की? कोन बात भेलैक अछि? काशीनाथ बजलाह- अपना इलाकामे एकटा ग्रामसेविका आएल अछि। वैद्यजी पुछलथिन्ह- 'ग्रामसेविका' कऽ...

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साहित्य (Literature) STORY ✓ मूल मैथिली

चर्चरी : 17. संगठनक समस्या

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

श्रीमान् सम्पादक जी, अत्र कुशलं, तत्रास्तु। आगाँ सुरति जे अपनेक पत्र भेटल। परंच लेख की पठाउ से फुरितहि ने अछि। नहि जानि कोन लग्नमे ई उन्माद सवार भेल जे समाजक संगठन करी। एक निवेदन लिखल और विशिष्ट व्यक्तिक सूची बनाय एक दिससॅं विदा भेलहुँ। कहल जे पहिने...

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चर्चरी : 20. घूरपरक गप्प

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि दिन भयंकर झपसी लधने रहय। यारकका घूरपर बैसल लोक आगि तपैत रहय। बीच-बीचमे तेहन पुरबैयाक झटक उठैक जे लोक सिहरि उठय। काशीनाथ बजलाह-एहने जाड़मे ब्राह्मण बाछा बेचि कऽ कंबल किनलन्हि। भोलबाब कहलथिन्ह-हौ, तोरा लोकनि जाड़ देखलह कहिया? जाड़ आएल रहय उनासी...

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चर्चरी : 21. पोखरिपरक गप्प

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि दिन भोज खा कऽ लोक फिरल चल अबैत रहय कि मकुनाही पोखरि लग वर्षा झहरय लगलैक। लोक पड़ा कऽ ब्रह्मथान तर आबि बैसल। मड़ैयामे बड़का सौंफ पसरल रहैक से लोक सॅं भरि गेल। लंबोदर चौधरि बजलाह-इह! गर्मी सॅं मिजाज अक्कसक्क छल। आब जा कऽ ठंढा भेल। दीर्घनारायण...

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चर्चरी : 18. दलानपरक गप्प

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि दिन लालककाक दलानपर गप्प जमि गेल। हुनका ओहिठाम चतुर्थीक हकार पूरय लोक आएल रहय। चानन-काजर होइत रहैक। ताही बीचमे पहुँचि गेलाह भोलबाबा । पं० जी पान-सुपारी आगाँ बढ़बैत कहलथिन्ह - लेल जाओ । भोलबाबा कहलथिन्ह - अहाँ विद्वान छी, पहिने अहीं लियऽ । पं० जी...

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खट्टर ककाक तरंग : 28. खट्टर ककाक टटका गप्प

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

एम्हर एकदिन खट्टर कका सॅं भेट भेल छल । पुछलिऎन्ह- खट्टर कका प्रशन्न छी ? बजलाह- प्रशन्न की रहब ? सन्न छी । अपना देशक हालति देखिकऽ । सुजला, सुफला, शस्यश्यामला भूमि में हमरा लोकनि अजला अफला, सुन्यश्यामला बना देलिऎन्ह और भिक्षापात्र नेने संसार क आगाँ...

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द्विरागमन : अध्याय 10 - वर-बरियातक विधि

रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास

तार पहुँचैत देरी खढ़भढ़ मचि गेल लालकाकी बजलीह कहू त भला एना कतहु द्विरागमन भेलैक अछि ! भोलानाथ अनुमोदन करैत कहलथिन्ह - त ! द्विरागमन मे कतेक ओरिआओन करय पडै़ छैक । कन्याक हेतु कपड़ा-लत्ता, गहना-गुरिया....... ला० - बाजू-बिजौठ, बड़हरी, नकमुन्नी,...

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द्विरागमन : अध्याय 3 - 'रोमांस'क उदय

रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास

सी० सी० मिश्र कैं ओहि राति बड़ी काल धरि नीन्द नहि पड़लैन्ह। मिस बिजलीक दमक सॅं निद्रोक आँखि में, चकाचौन्ह लागि गेलैन्ह। हुनक मस्तिष्क तेना विक्षोभित भऽ उठलैन्ह जे घंटो विचार- तरंग मे ऊब-डूब होइत भसियाइत रहलाह। सी० सी० मिश्र मनहिमन बिजली और बुचियाक...

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साहित्य (Literature) NOVEL ✓ मूल मैथिली

द्विरागमन : अध्याय 8 - ग्रहण-स्नान

रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास

काशी स्टेशन पर उतरितहिं, यात्री-दल कैं चारू कात सॅं पंडाक झुण्ड घेरि कऽ चरो-बेरो कऽ लेलेकैन्ह। बाप-पितामहक नाम बूझि एक पंडा भोलानाथ आगाँ लगलैन्ह, दोसर पाछाँ। फाटक सॅं बहराइतहिं भीम पंडा कुली कैं ललकारि एक ताङ्गा पर पेटी लदबाबय लागल! ई देखि हनुमान...

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साहित्य (Literature) NOVEL ✓ मूल मैथिली

द्विरागमन : अध्याय 5 - 'रोमांस' अन्त

रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास

बिजली देखलन्हि जे 'एक अनाड़ी फतिङ्गा मॅंडरा कऽ जान देबा पर वृत्त अछि । दया कऽ कऽ एकरा निर्दयतापूर्वक झाड़ि देवक चाही, नहि त ई झरकि कय जरि जायत । एक दिन बिजली सी० सी० मिश्र कैं अपना गाड़ी मे हवा खोआबक हेतु बहुत दूर लऽ गेलथिन्ह । मिश्र जी हवागाड़ी मे...

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कन्यादान : अध्याय 5 - गोसावनि क गीत

रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास

झारखंडीनाथ तार क अर्थ घोंखैत-घोंखैत गाम दिशि विदा भेलाह । एही धुन मे मस्त भेल बढल चल अबैत छलाह कि पाछां कनपट्टी लग घंटी टनटना उठलैन्ह । जहिना पाछाँ फिरि कऽ ताकय लगलाह कि नीचा साइकिल कऽ अगिला पहिया सरसराइत साँची धोती क मध्यभाग मे सन्हिया गेलैन्ह ।...

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खट्टर ककाक तरंग : 1. दही चूडा चीनी

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

खट्टर कका दलान पर बैसल भाङ्ग घोटैत छलाह । हमरा अबैत देखि बजलाह – हॅं!- हॅं;....ओम्हर मरचाइ रोपल छैक, घूमि कऽ आबह। हम कहलिएन्ह - खट्टर कका, आइ जयवारी छैक, सैह सूचित करय आयल छी खट्टर कका पुलकित होइत बजलाह - वाह वाह ; तखन सोझे चलि आबह। दू एकटा धङ्गेवे...

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खट्टर ककाक तरंग : 14. प्राचीन आदर्श

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

खट्टर कका हमरा हाथ में मोटगर पुस्तक देखि पुछलन्हि - हौ, ई की थिकैक ? हम कहलिऎन्ह - आदर्श चरितावली । खट्टर कका उनटबैत-पुनटबैत बजलाह – ई सभ पढने माथा खराब भऽ जैतौह । हम - खट्टर कका, ई की कहैत छी ? एहि में एक सॅं एक आदर्श चरित्र भरल छथि जिनकर अनुकरण...

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साहित्य (Literature) FOLK_TALE 🔄 अनुवाद प्रत्याशी (Hindi Source)

भाई को सीख

रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा

“देख भोनू ! मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ । तुम्हारा भला ही सोचूँगा। यह घर हमारा है हम लोगों का है । घर की बात घर में रहने दे।... तुम्हें हो क्या गया है ? तुम तो बचपन से ही मेरे लाड़- प्यार में रहे हो ! भला बताओ, मैं तुमसे अलग कैसे हो जाऊँ ; या तुमको...

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खट्टर ककाक तरंग : 3. माछक महत्व

रचयिता: हरिमोहन झा • कथा

ओहि दिन माछ पर शास्त्रार्थ बजरि गेल। बात भैलैक जे खट्टर कका पोखरि सॅं स्नान कैने चल अबैत रहथि। हम पुछलिऎन्ह - की खट्टर कका, माछ खाइ ? खट्टर कका बजलाह – अवश्य, अवश्य । कोन माछ छौह ? नेबो छौह कि बाडी सॅं नेने चलू ? हम कहलिऎन्ह - केवल सिद्धान्तक...

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