STORY कथा PUBLIC_DOMAIN ✓ मूल मैथिली

अपराजिता

लेखक: राजकमल चौधरी
(1964)
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पटना शहरक छोट सन भाड़ाक कोठलीमे बैसल अनिमेषकेँ सहसा अपन गामक पोखरिक भीड़क अपराजिता फूल मोन पड़ि गेल। नील रंगक ओ फूल जे साओन-भादवक वर्षाकेँ सहि कऽ खिलैत छल। शहरक भागदौड़, समझौता आ कृत्रिमताक बीच ओ अपराजिता फूल जकाँ अपन स्वाभिमानकेँ बचा कऽ रखबाक चेष्टा करि रहल छल। कथाकार राजकमल चौधरी मानव मनक अंतर्द्वंद्वकेँ जहि सूक्ष्मता सँ उकेरने छथि, ओ मैथिली गद्यक गौरव अछि।
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राजकमल चौधरी

मैथिली आधुनिकतावादक विद्रोही कवि एवं कथाकार। 'मछरी', 'आंदोलन' आ 'स्वरगंधा' जनि रचना सँ मैथिली कथा जगतकेँ नवीन क्षितिज देलन्हि।

व्यक्तित्व ओ रचनावली ➔

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