चारि मित्र आर बुद्धिक परीक्षा
✍ पारंपरिक लोकवार्ता (1890)
एक बेर मिथिलाक एक सुरम्य गाममे चारि मित्र रहैत छलाह। तीन गोटे शास्त्रमे परम पारंगत छलथि, मुदा व्यवहारिक बुद्धिक अभाव छलन्हि। विद्या आर...
विद्यापति केर अमर पद सँ लऽ कऽ आधुनिक कथा, कविता, लोकगाथा आ बाल-साहित्य केर प्रामाणिक डिजिटल संग्रह।
✍ पारंपरिक लोकवार्ता (1890)
एक बेर मिथिलाक एक सुरम्य गाममे चारि मित्र रहैत छलाह। तीन गोटे शास्त्रमे परम पारंगत छलथि, मुदा व्यवहारिक बुद्धिक अभाव छलन्हि। विद्या आर...
✍ राजकमल चौधरी (1964)
नगरक कोलाहलमे गामक स्मृतिक सुगंध आ जीवनक कठिन सत्यक साक्षात्कार...
✍ लिली रे (1978)
मिथिलाक सामाजिक परिवेशमे स्त्रीक अस्मिता, संघर्ष आ आत्मनिर्णयक प्रेरक आख्यान...
✍ राजकमल चौधरी (1965)
बाजार सँ अनल गेल मछरी आ गामक पारिवारिक संवेदना केर आधुनिक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण...
✍ हरिमोहन झा (1933)
मिथिलाक ग्रामीण जीवनमे अंग्रेजी पढ़ल नवयुवकक विवाह आर परंपराक बीच द्वंद्वक सजीव चित्रण...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर काका अपन दालान पर गद्दा पर बैसकऽ पानक बीड़ा मुँहमे दैत कहलन्हि— 'हे बौआ! दुनियाक सब दर्शन एक दिस, आ मिथिलाक दही-चूड़ा एक दिस!'