STORY कथा PUBLIC_DOMAIN ✓ मूल मैथिली

कन्यादानक प्रसंग

लेखक: हरिमोहन झा
(1933)
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प्रोफेसर सी.सी. मिश्र जब अपन ससुराल पहुँचल छलाह, तँ गामक लोक सभ हुनक कोट-पतलून देखि अचरजमे पड़ि गेल छल। ससुरालमे सासु जी आग्रह कयलन्हि— 'बौआ, पतलून खोलि कऽ धोती पहिरू, कनियाँक सोझाँ अंग्रेजी वेश नहि चलत।' मिश्र जी अपन आधुनिकताक शेखी बघारैत कहलन्हि जे वस्त्र सँ विचार नहि बदलि जाइत अछि। मुदा जब मिथिलाक परिहास-प्रिय सरहज सभ हुनक चुहलबाजी शुरू कयलक, तँ प्रोफेसर साहबक सब अंग्रेजी ज्ञान धरलहि रहि गेल। 'कन्यादान' उपन्यासक ई प्रसंग देखाबैत अछि जे किना आधुनिक शिक्षाक अहंकार मिथिलाक सहज, आत्मीय सांस्कृतिक हास-परिहासक सोझाँ झुकैत अछि।
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हरिमोहन झा

मैथिलीक अद्वितीय हास्य-व्यंग्यकार ओ उपन्यासकार। 'कन्यादान', 'द्विरागमन' आ 'खट्टर काकाक तरंग' केर अमर रचयिता।

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