STORY कथा PUBLIC_DOMAIN ✓ मूल मैथिली

मरीचिका (अंश)

लेखक: लिली रे
(1978)
⏱ 5 मिनट पाठ 👁 143 बार पढ़ल गेल 📜 लिपि: Devanagari
अक्षर (Size):
गंगाक कछेर पर बैसल कल्याणी अनन्त जलराशि दिस ताकि रहल छलीह। हुनक मनमे अतीत आ वर्तमानक तरंग सभ एक संग टकरा रहल छल। मिथिलाक चारि दीवारिक भीतर नारीक त्यागकेँ सभ पूजक रूप दैत छल, मुदा ओकर अपन इच्छा, आकांक्षा आ अस्तित्वक मोल कखनो केओ पुछलक छल? 'हम केवल परंपराक बोझ ढोयबामे अपन जीवन व्यर्थ नहि करब,' कल्याणी अपन मनहिं-मन संकल्प कयलन्हि। लिली रे केर 'मरीचिका' उपन्यास मैथिली साहित्यमे स्त्री-विमर्शक मीलस्तंभ अछि, जे मिथिलाक परंपराक सम्मान करैतहुँ रूढ़िवादक प्रति विद्रोहक स्वर प्रस्फुटित करैत अछि।
ल

लिली रे

साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ सम्मानित विदुषी लेखिका। हुनक उपन्यास 'मरीचिका' नारी संवेदना ओ समाजक गभीर अन्वेषण अछि।

व्यक्तित्व ओ रचनावली ➔

⚖ अनुज्ञप्ति, स्रोत एवं प्रामाणिकता (License, Provenance & Quality)

अनुज्ञप्ति: PUBLIC_DOMAIN • गुणवत्ता स्तर: समुदाय/परम्परा (Community/Heritage)

🎙️ वाचन / ऑडियो स्थिति: वाचन पाठ प्रत्याशी (Audio Recording Requested)

मैथिली लोक खुला ज्ञान आ साहित्यक डिजिटलीकरणक लेल समर्पित अछि। एहि रचनाक कोनो त्रुटि वा सर्वाधिकार संबंधी संज्ञान लेल कृपया संपर्क करू।