सामा-चकेवाक अमर कथा
भाई-बहिनक अगाध स्नेहक पावन पर्व सामा-चकेवाक पौराणिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि...
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भाई-बहिनक अगाध स्नेहक पावन पर्व सामा-चकेवाक पौराणिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि...
बात ओहि दिनक अछि जखन गोनू झा दरबार मे छलाह। मिथिला नरेश हुनका एक सप्ताह के लेल शाही अतिथि बना कऽ रोकने छलथि। गोनू झा पत्नी आ भाई भोनू झा गाम मे छल। घुरिया आ ओकर साथी सब हवालात में बंद छल। घुरियाक एकटा मित्र छल। ओकर नाम छल छुट्टन पासी। ओहो चोर छल। ओ...
मिथिला नरेश के दरबार में गोनू झा के बुद्धिकौशल और वाक्चातुर्य का जो जादू चल रहा था उसकी कीर्ति मिथिलांचल के आस -पास के क्षेत्रों में भी फैल चुकी थी । मिथिला के पड़ोसी राज्य अंग देश के राजा ने राज्योत्सव के कई अवसरों पर गोनू झा को विशेष रूप से...
गोनू झा गद्गद मन से मिथिला नरेश के दरबार से अपने घर की ओर जा रहे थे। महाराज ने उन्हें एक भैंस भेंट की थी । भैंस बड़ी मस्त, मोटी ताजी थी । दूध भी खूब देती थी । गोनू झा अपने हाथ में भैंस के गले की रस्सी थामे मस्त चाल में चले जा रहे थे। रास्ते में...
मधुकान्त बाबू जखन कालेज मे नाम लिखौलन्हि त शौक भेलैन्ह जे सूट बनबाबी। जखन सूट बनबौलन्हि त शौक भेलैन्ह जे ई पहिरि कऽ सासुर जाइ। अतएव फगुआ सॅं चारि दिन पहिने जखन लाल रंगक फूलदार लिफाफ डाकपिउन हाथ मे देलकैन्ह तैखन ओ बुझलन्हि जे आब सूट पर इस्त्री चढाबक...
बर्तुहारीक प्रसंग मे बहुतो तरहक अनुभव लोक कैं प्राप्त भऽ जाइत छैक । एक ठाम हमरो तेहन भयंकर सत्कार भेल जे स्मरण कय औखन देह सिहरि उठैत अछि। घटकराज सोनमनि चौधरी कहलन्हि- अमुक गाम मे एकटा बड़ सुन्दर कथा हमरा नजरि मे अबैत अछि। ओ उच्च वंशक छथि, प्रायशः...
सरस्वती दाइ अत्यन्त संस्कारिणी ओ चमत्कारिणी छलीह । दुर्गा ओ गीता पाठ करयवाली । बजबाक चमत्कार तेहन जे अरिकोंच कैं 'अरिकंचन' कहैत छलीह, बॅंसबाड़ि 'वंशवाइरि' । परन्तु भगवानो त विचित्र कौतुकी छथि । हुनक विवाह भेलैन्ह भदेशक मौजे लाल झा सॅं जे निट्ठाह...
गाम मे दू टा ज्योतिषी रहथि। एक फोंचाइ झा, दोसर खट्टर झा। दुहू ज्योतिषी अगाध विद्वान। परन्तु दुहू मे अश्वमाहिष्य योग लागल रहैन्ह। एक ईर घाट, त दोसर वीर घाट। एक जे बाजथि तकरा दोसर बिनु कटने नहि रहथि। विशेषतः जितिया और छठि मे दुहू दिग्गजक भिड़ान देखबा...
पहिल दृश्य [स्थान: स्टेशनक प्लैटफार्म, एक प्रौढ़ा महिला सेकेंड क्लासक जनानी डब्बामे चढय चाहै छथि, ओम्हर रेलक भीतर सॅं एक नवयुवती दरवाजा छेकि कऽ ठाढि भऽ जाइ छथिन्ह, प्रौढाक पाछाँ कुली माँथ पर पेटी बिछौन नेने थक्कमक्क ठाढ अछि। तावत् घंटी पड़ि जाइ छैक। ]...
रमेश बाबू, ओ कन्या साक्षात् लक्ष्मी थीक। देखबामे दुर्गाक मुर्त्ति, शील-स्वभावमे गंगा। भोजन कराबयमे अन्नपूर्णा। कहाँ धरि वर्णन करू? भोरे उठि फूल तोड़ैत अछि। गोसाउनि सीर निपैत अछि। अर्घी-सराइ मजैत अछि। स्नान कय भगवतीक पूजा करैत अछि। ई सभ कार्य...
हमरा पुर्नियाँ जैबाक छल। परन्तु जे गाड़ी ७ बजे साँझमे कटिहार पहुँचबाक रहय से पहुँचल ९ बजे रातिमे। परिणाम ई जे कनेक्शन छूटि गेल। आब भोरमे ५ बजे गाड़ी भेटत। राति भरि एत्तहि स्टेशनमे रहय पड़त। अगत्या वेटिंग रूमक बाट धैलहुँ। कुली माथपर ट्रंक बिस्तर लऽ कऽ...
आहि दिन पं० जीक चौपाड़िपर नोतिहारी सभ बैसल रहथि। बिझौ भऽ गेल रहैक, परन्तु भोजनमे किछु विलंब रहैक। ताही बीचमे पहुँचि गेलाह भोलबाबा। हुनका अबितहि सभ उल्लसित भऽ उठल जे आब गप्पक छुरुक्का उड़त। काशीनाथ कहलथिन्ह - आउ बाबा ! भल्लह बेर पर जुमलहुँ । एखन यैह...
ओहि दिन वर्षा झहरैत रहैक। हम क्लबमे बैसल चाह पिबैत रही। संगी सभ ताश-शतरंज खेलि कऽ अपन-अपन घर चलि गेल रहथि। एसकरमे समय काटब अब्बुह बूझि पड़ैत छल। तावत् देखैत छी जे मधुकरजी झटकल आबि रहल छथि। मधुकरजी रंगीन लोक। तेहन-तेहन गुलाबी गप्प छोड़ैत छथि जे सुननाहर...
भोलानाथ झा भोजन-छाजन क उपरान्त भाउजि कैं कहलन्हि- हमरा फेरि स्टेशन जाय पड़त । एहि ठाम क सभटा भार अही लोकनि क उपर रहल । ठकबा अछिए । जे किछु मॅंगाबक हो से मॅंगा लेब । झुनियाँमाय कैं बराबरि एत्तहि रहय कहबैक । देखब कोनो बात क विथुति नहि हो । बहुत पैघ लोक...
- हॅ ऎ बहिना । यैह त कठिन भऽ गेलैक अछि। जहां वर भारी 'गिलास' मे अङ्ग्रेजी पढि जाइत छैक, तहां वर क बाप हजार सॅं नीचा पर गप्पे नहि करैत छैक। गरिबहा लोक एतेक कतय सं आनत। - ततबे धरि नहि । विवाह होइत देरी 'मोटर दियऽ, बाइसिकिल दियऽ, आगां पढ क लेल फीसदियऽ।...