सार्वजनिक ज्ञान आ साहित्य निधि (Public Knowledge & Literature)

मैथिली डिजिटल पुस्तकालय

विद्यापति केर अमर पद सँ लऽ कऽ आधुनिक कथा, कविता, लोकगाथा आ बाल-साहित्य केर प्रामाणिक डिजिटल संग्रह।

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उपन्यास (Novel) 📖 12 अध्याय / भाग

कन्यादान

✍ हरिमोहन झा (1930)

मैथिली भाषाक प्रथम अत्यंत लोकप्रिय आधुनिक उपन्यास। मिथिलाक वैवाहिक रीति-नीति, अनमेल विवाह, अशिक्षा आ आधुनिकताक द्वन्द्वक सजीव एवं मार्मिक चित्रण।

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द्विरागमन

✍ हरिमोहन झा (1943)

'कन्यादान' उपन्यासक बहुप्रतीक्षित उत्तर-भाग (सीक्वल)। सी० सी० मिश्र आ बुच्ची दाइक द्विरागमन उपरान्तक दाम्पत्य, सामाजिक सुधार आ हास्य-परिहासक कथा।

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अध्यायवार रचना पाठ (Chapters)

कुल 24 रचना
NOVEL
⏱ 11 मिनट पाठ
📖 कन्यादान • अध्याय 7

कन्यादान : अध्याय 7 - जटिल समस्या

✍ हरिमोहन झा (1930)

भोलानाथ झा भोजन-छाजन क उपरान्त भाउजि कैं कहलन्हि- हमरा फेरि स्टेशन जाय पड़त । एहि ठाम क सभटा भार अही लोकनि क उपर रहल । ठकबा अछिए । जे...

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NOVEL
⏱ 24 मिनट पाठ
📖 द्विरागमन • अध्याय 7

द्विरागमन : अध्याय 7 - तीर्थयात्रा

✍ हरिमोहन झा (1943)

भादवक पूर्णिमा कैं चन्द्रग्रहण थिकैक । लालकाकी एहि बेरि सदलबल काशी जैबाक न्यार कैने छथि । दल मे रहथिन्ह ढुनमुन काकी, बुच्चीदाइ,...

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NOVEL
⏱ 8 मिनट पाठ
📖 कन्यादान • अध्याय 8

कन्यादान : अध्याय 8 - गुप्त परामर्श

✍ हरिमोहन झा (1930)

-काग की दोस? -काग। -फक्का मुट्ठी बारह। आब लाबह बारहटा अंडी। -से त नहि होएतौह, हे सरौता! एतेक कन्ना नहि करह। एतबहि मे ढुनमुनकाकी ओहि ठाम...

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NOVEL
⏱ 21 मिनट पाठ
📖 द्विरागमन • अध्याय 8

द्विरागमन : अध्याय 8 - ग्रहण-स्नान

✍ हरिमोहन झा (1943)

काशी स्टेशन पर उतरितहिं, यात्री-दल कैं चारू कात सॅं पंडाक झुण्ड घेरि कऽ चरो-बेरो कऽ लेलेकैन्ह। बाप-पितामहक नाम बूझि एक पंडा भोलानाथ आगाँ...

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NOVEL
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📖 कन्यादान • अध्याय 9

कन्यादान : अध्याय 9 - कौतुक

✍ हरिमोहन झा (1930)

मिस्टर सी० सी० मिश्रा पड़ल-पड़ल भावी पत्नी क रंग-विरंगी काल्पनिक चित्र खिचबा मे तन्मय भेल छलाह । एहि बीच मे रेवतीरमण पहुँचि कहल्थिन्ह -...

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NOVEL
⏱ 20 मिनट पाठ
📖 द्विरागमन • अध्याय 9

द्विरागमन : अध्याय 9 - बुच्चीदाइक 'एडुकेशन'

✍ हरिमोहन झा (1943)

प्रोग्रामक अनुसार सी० सी० मिश्र सासुरक डेरा मे आबि गेलाह और रेवतीरमण हुनक निर्देशानुसार बुच्चीदाइ कैं पढ़ाबय लगलथिन्ह । चिट्ठी-पत्री त...

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NOVEL
⏱ 11 मिनट पाठ
📖 कन्यादान • अध्याय 10

कन्यादान : अध्याय 10 - कन्यादान

✍ हरिमोहन झा (1930)

मण्डप पर बैसितहि मिस्टर सी० सी० मिश्रक नेत्र सभ सॅं पहिने ओहि सुपरिचित गुलाबी साड़ी क अन्वेषण मे इतस्ततः घूमय लागल। ई देखि पं० नमोनाथ झा...

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NOVEL
⏱ 18 मिनट पाठ
📖 द्विरागमन • अध्याय 10

द्विरागमन : अध्याय 10 - वर-बरियातक विधि

✍ हरिमोहन झा (1943)

तार पहुँचैत देरी खढ़भढ़ मचि गेल लालकाकी बजलीह कहू त भला एना कतहु द्विरागमन भेलैक अछि ! भोलानाथ अनुमोदन करैत कहलथिन्ह - त ! द्विरागमन मे...

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NOVEL
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📖 कन्यादान • अध्याय 11

कन्यादान : अध्याय 11 - चतुर्थी क राति

✍ हरिमोहन झा (1930)

घोर अन्धकार व्याप्त भय रहल अछि। आकाश मे समुद्र क लहरि जकाँ चारू कात सॅं कारी-कारी मेघ उमड़ रहल अछि। बीच-बीच मे बिजली चमकि उठैत अछि।...

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NOVEL
⏱ 12 मिनट पाठ
📖 द्विरागमन • अध्याय 11

द्विरागमन : अध्याय 11 - सामाजिक आन्दोलन और भोजभात

✍ हरिमोहन झा (1943)

गामक पंडित-प्रधान कैं एकत्र कऽ बुचकुन चौधरी कहलथिन्ह - आब 'ठोप' मेटा कऽ 'टोप' पहिरै जाउ और टीक कटा कऽ विलायतक टिकट कटबै जाउ । 'ईश' क...

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NOVEL
⏱ 3 मिनट पाठ
📖 कन्यादान • अध्याय 12

कन्यादान : अध्याय 12 - उपसंहार

✍ हरिमोहन झा (1930)

क्रमशः वर्षा थम्हि गेल। बिहाड़ियो बन्द भऽ गेल । आकाश निर्मल भऽ गेल। जखन भुरुकबा उगि गेलैक तखन बड़कागामवाली चुप्पहि उठि बूच्चीदाइक कोनट...

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NOVEL
⏱ 14 मिनट पाठ
📖 द्विरागमन • अध्याय 12

द्विरागमन : अध्याय 12 - समदाउनि

✍ हरिमोहन झा (1943)

भोजक प्राते भेने द्विरागमनक विचार होमय लागल । भोलानाथ और कंटीर वस्तुजात कीनक हेतु दरिभंगा बिदा भेलाह । चिट्ठा देखि बुच्चिदाइ माय कैं...

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